गुस्से को हराने वाला ही सच्चा विजेता है | बुद्ध का गहरा संदेश

गुस्से को हराने वाला ही सच्चा विजेता है | बुद्ध का गहरा संदेश

“क्या आप जानते हैं कि जीवन में सबसे बड़ी हार तब होती है, जब हम अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाते?
गुस्सा न सिर्फ हमारे रिश्तों को तोड़ता है, बल्कि हमारे भीतर की शांति और खुशियों को भी जला देता है।
आज की कहानी आपको दिखाएगी कि कैसे एक छोटी सी सीख से आप अपने गुस्से को नियंत्रित कर सकते हैं।
अगर आप भी जल्दी गुस्सा हो जाते हैं, तो इस कहानी को अंत तक जरूर पढ़े । ”

“सुरेश एक मेहनती और ईमानदार व्यक्ति था।
पर उसमें एक कमी थी — वह छोटी-सी बात पर भी जल्दी गुस्सा हो जाता।
ऑफिस में अगर कोई गलती कर देता, तो वह सबके सामने डांटने लगता।
घर पर भी उसकी यही आदत परिवार को दुखी कर देती।
धीरे-धीरे लोग उससे दूर होने लगे।
सुरेश को लगता था कि लोग उसकी कदर नहीं करते, जबकि असल में लोग उसके गुस्से से डरते थे।”

“एक दिन सुरेश एक संत के पास पहुँचा और बोला,
‘संत जी, मैं बहुत परेशान हूँ।
लोग मुझसे दूर भागते हैं। मैं उनसे प्यार करना चाहता हूँ, पर जाने क्यों मेरे भीतर गुस्सा आ ही जाता है।’

संत ने मुस्कुराकर एक गिलास पानी में नमक डाला और सुरेश को पीने के लिए दिया।
सुरेश ने जैसे ही पानी चखा, उसका चेहरा बिगड़ गया और बोला,
‘संत जी, यह तो बहुत कड़वा है।’

संत ने फिर उसे पास ही बने तालाब से पानी लाने को कहा।
फिर उसी में एक मुट्ठी नमक डालकर कहा,
‘अब इस पानी को पियो।’
सुरेश ने पानी पिया और बोला, ‘इसमें तो कोई कड़वाहट नहीं है।’”

“संत ने कहा,
‘नमक वही है, पर फर्क सिर्फ पात्र का है।
जब मन छोटा हो, तो गुस्सा पूरे जीवन को कड़वा बना देता है।
लेकिन जब मन विशाल हो, तो वही गुस्सा महत्वहीन हो जाता है।’

फिर संत ने बुद्ध का एक वचन सुनाया:
‘गुस्सा पकड़े रहना ऐसा है जैसे तुम जलते हुए अंगारे को किसी और पर फेंकना चाहते हो,
पर सबसे पहले वह तुम्हें ही जला देता है।’”

“सुरेश ने उसी दिन से एक संकल्प लिया —
अब हर बार गुस्सा आने पर वह गहरी सांस लेगा और खुद से कहेगा:
‘मेरा मन विशाल है, यह गुस्से से बड़ा है।’
धीरे-धीरे उसका स्वभाव बदलने लगा।
लोग फिर से उसके करीब आने लगे।
सुरेश ने समझ लिया कि असली ताकत गुस्से में नहीं, बल्कि गुस्से को जीतने में है।”

“इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है:

  1. गुस्सा हमेशा हमें ही जलाता है, दूसरों को नहीं।
  2. मन को विशाल बनाकर ही हम गुस्से को छोटा कर सकते हैं।
  3. धैर्य और शांति ही स्थायी रिश्ते और सच्ची सफलता की नींव हैं।

Buddha कहते हैं, ‘गुस्से को जीतने वाला व्यक्ति वही है जो सच्चा विजेता है।’”

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